about us
Manish Gehlot

माली सैनी समाज का इतिहास अति प्राचीन, गौरवमयी तथा श्रम की साधना एवं महत्वत्ता का दस्तावेज है। माली समाज की प्राचीनता की नामीलाल उसे वैदिक संस्कृति व परम्परा के अन्तगर्त आने वाले कृषक वर्ग से संबधित करती है। माली समाज प्राचीन काल से ही श्रमनिष्ठ, सेवाभावी, परोपकारी तथा सरल स्वभाव का धर्म परायण समाज रहा है जो प्रकृति के हृदय पयार्वरण की कोख और देशी अस्मिता से सम्पर्क में रहा है और जिसने अपने परिश्रम, मानवीय कर्मो से परिपूर्ण जीवन के आधार भारतीय समाजों में अपना एक विशिष्ट स्थान स्थापित किया है। ठेठ भारतीय ग्रामीण संस्कृति व जमीन से जुड़ा यही वो मेहनतकश समाज है जिसने हाड़ तोड़ परिश्रम कर अपने शरीर को जला गलाकर शोषित होकर भी पूर्ण निष्काम भावना से पर हितार्थ कार्य करता रहा। अपने पसीने से पके बाद्यान्नों से धरा के अन्य मानवों का पेट तथा देश के भण्डारों को भरता रहा है। भारतीय लोक परम्परा और संस्कृति में रचे बसे विचारों से मानवीय व प्रगतिशील माली सैनी समाज में ही ज्योति बा फूले, सावित्री बाई फूले जैसे समाज सुधारका और श्री लिखमीदास जी जैसे संत हुए है। जिन्होंने गहरे प्रतिरोधों और आलोचनाओं से संघर्ष करते हुए स्त्रियों, पिछड़ो और शोषितों के प्रति प्रचिलत रूढ़ियों, परम्पराओं को तोड़ा तथा उन्हें हाशिए से उठा कर समाज की मुख्य धारा में प्रविष्ट कराया। ये ही समाज की वे महान विभूतियां है जिन्होंने मनुष्यता और उसके आवश्यक कोमल तत्वों में आस्था व गहन प्रतिबद्धता रखते हुए सत्ता के प्रति विद्रोह किया इसी कारण इनके सम्मुख बड़े-बड़े अधिकारी अफसर, राजा महाराजा तो झुकते ही थे। इतिहास गवाह है कि संत श्री लिखमीदास जी के खेत में पाणत करने हेतु स्वयं भगवान को जमीन पर आना पड़ा था। यह श्रम और भक्ति के महत्व व मान को प्रदर्शित करता उदाहरण है। आज माली समाज ने आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्रों में बड़ी प्रगति की है। समृद्धि को प्राप्त किया है तो इसके पीछे परिश्रम, सरलता और व्यवहार कुशलता ही प्रमुख आधार है। किन्तु प्रगति व विकास के साथ साथ समाज के बंधुओं की व्यस्थता बढ़ी है, उनके मध्य दूरियों ने जगह बना ली है। अपनों से पहचान कम हुई है। परस्पर संवाद संपर्क के तार टूट गए है और सामाजिक - स्नेह - स्त्रिधता भी ठोस हो गई है। इन्हीं मुश्किलों और असुविधाओं से रूबरू हो 'माली सैनी संदेश' का प्रकाशन किया जाता है।

माली सैनी संदेश पिछले सात वर्षो से समाज में अपनी अलग पहचान बनाएं है तो वह सिर्फ समाज के समाचारों की जानकारी के बल पर नहीं वरन समाज में होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में अपने सहयोग से, हमारा यही उद्देश्य है कि हमारे समाज में भी ऐसे कार्य हो जिससे हमारा समाज अन्य समाजों की तरह सभी क्षेत्रों में आगे आयें तथा सामाजिक एकता की मिसाल कायम हो। ऐसे ही प्रथम प्रयास में 'माली सैनी संदेश' ने जोधपुर माली सैनी समाज के सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निर्देशिका का प्रकाशन किया जो बहुप्रतिक्षित थी। माली सैनी समाज की मासिक पत्रिका 'माली सैनी संदेश' के द्वारा प्रकाशित इस निर्देशिका में उपलब्ध कराया गया था।

बहुसंख्यक माली-सैनी समाज द्वारा समाज हित में अनेकानेक गतिविधियों का संचालन होता है। यहाँ समाज के अनेक संगठन/संस्थाएँ/संस्थान आदि सक्रिय है जो अपनी गतिविधियों के लिए विशेष पहचान बनाये हुए हैं। मानव मात्र को प्रेरणा प्रदान करने के लिए यहाँ संत महात्माओं के सदुपदेश सुलभ हैं वहीं आजीविका के लिए जोधपुर लाल पत्थर देश विदेश में जोधपुर की धाक जमाये हुए है। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यहां समाज के कई महाविद्यालय, छात्रावास आदि उपलब्ध है वहीं बालक / बालिकाओं के भविष्य निर्माण / रोजगार प्राप्ति के लिए प्रशिक्षा केन्द्र भी सुलभ है। राजनैतिक क्षेत्र में भी समाज का वर्चस्व रहा है समाज में कुरीतियों के निवारण तथा नवीन परम्पराओं की स्थापना के लिए भी संस्थानों द्वारा प्रयत्न किया जाता रहा है यहाँ प्रयोग के तौर पर सामूहिक विवाह भी आयोजित हुए किन्तु 'युवक युवती परिचय सम्मेलन' की यहाँ हमेशा से कमी महसूस की जाती रही है।

इस कमी को पूरा करने का बेड़ा उठाया 'माली सैनी संदेश' के कार्यकर्ताओं ने और इसे करके भी दिखाया। 'माली सैनी संदेश' के माध्यम से पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया गया। समाज के व्यवसाइयों, कार्यकर्ताओं तथा दानदाताओं के सहयोग से विशाल प्रांगण। दो सौ से अधिक विवाह योग्य युवक- युवतियों का पंजीयन निर्धारित समय तक किया जा चुका था। उनमें से अधिकांश सम्मेलन में भाल लेने के लिए उपस्थित भी हुए। अतिथियों का आगमन पूर्व संध्या से प्रारंभ हो चुका था। सबके आवास, भोजन आदि की पर्याप्त एवं संताषजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई। 'माली सैनी संदेश' के प्रधान संपादक श्री मनीष गहलोत तथा उनके प्रमुख सहयोगी श्री सोहनलाल साँखला सहित अन्य कई कार्यकर्ताओं को परिचय सम्मेलन को संवारते हुए सहज ही देखा जा सकता था। पूर्व निर्धारित स्थान 'भाटी - मैमोरियल हॉल' था किन्तु स्थानाभाव की आशंका से निकट स्थित मैदान में ही पाण्डाल सजाकर समुचित व्यवस्थाएँ की गई। परिचय देने वाले युवक- युवती, अभिभावक, पत्रकार, गणामान्य नागरिक आदि सभी के लिए पृथक- पृथक स्थान निर्धारित थे। मुख्य अतिथी के रूप में रामस्नेही युवा संत श्री रामप्रसाद जी महाराज के शुभागमन के साथ ही सम्मेलन की हलचल में तीव्रता आ गई। समारोह की अध्यक्षता डॉ. ओम कुमार गहलोत (महापौर, नगर निगम) ने की। विशिष्ठ अतिथी के रूप में श्री जगदीशसिंह भाटी, श्री राजेन्द्र परिहार, श्री सुनील परिहार आदि ने भी परिचय सम्मेलन की श्रीवृद्धि की। महाराज श्री ने महात्मा ज्योतिराव फूले तथा संत शिरामणि श्री लिखमीदास जी महाराज के चित्रों पर माल्यार्पण करके सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत की। प्रारम्भ में महाराज श्री ने उसे परिचय पुस्तिका का विमोचन भी अपने कर कमलों से किया। उसमे विवाह योग्य लगभग दो सौ युवक-युवतियों का विस्तृत विवरण प्रकाशित किया गया है। सम्पादक - मण्डल में प्रधान सम्पादक के रुप मे श्री मनीष गहलोत, श्री किशन लाल साँखला व श्री पंकज गहलोत ने भी सह - सम्पादक की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर इसे चिरस्मर्णीय बनाया। महाराज श्री रामप्रसाद जी ने अपने उद्बबोधन में समाज के विकास के लिए ऐसे आयोजनों को आवश्यक बताया। श्री राजेन्द्र परिहार ने जोधपुर में परिचय सम्मेलन की कमी को पूरा करने के लिए आयोजक श्री मनिष गहलोत तथा सहयोगियों का हार्दिक आभार प्रकट किया। यह परिचय सम्मेलन बहुत सफल रहा जिससे आयोजक / कार्यकर्ता अति उत्साहित है तथा निकट भविष्य में यहाँ सामूहिक विवाह के आयोजन कि सम्भावनाएं भी प्रबल हो गई। यहीं कारण है कि अब माली समाज जोधपुर की प्रमुख संस्थान ने प्रति वर्ष सामूहिक विवाह का आयोजन प्रारंभ किया है जो करीब 12 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद नियमित प्रतिवर्ष प्रारंभ किया जा रहा है।

हमारा यह प्रयास है कि समाज में रचनात्मक, सामाजिक, राजनैतिक, शैक्षणिक क्षैत्रों के साथ अन्य क्षैत्रों में समाज का वर्चस्व बढ़े तथा हमारा समाज भी देश के विकास में अपना प्रबल सहयोग प्रदान करें। जब हमनें 'माली सैनी संदेश' समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया तो यह केवल 4 पृष्ठों का था। लेकिन समाज मे मिल रहे सहयोग एवं आशीर्वाद से अब यह एक 28 पृष्ठो की पत्रिका के रुप में हर माह देश विदेश मे फैले समाज के सभी वर्गो को उपलब्ध हो रही है। इसी कड़ी में समाज की प्रथम वेब साईट लांच की गई जिसमें समाज के इतिहास के साथ महापुरुषों, समाजसेवियों, राजनीतिज्ञों, अधिकारियों, संतों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई तथा साथ ही समाज की प्रथम ऑन लाईन डायरेक्ट्री भी बनाई गई जिसमें सभी वर्गो के व्यवसायियों की जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराई गई है। अतिशीघ्र 'माली सैनी संदेश' द्वारा समाज के गांधी श्री अशोक गहालोत के जीवन से प्रेरित होकर उनके जीवन व राजनीति जीवन का संपूर्ण ब्यौरा प्रदान किया गया है। तथा उनके प्रतिदिन के कार्यक्रमों, संदेशों, सम्मेलनों, योजनओं, एवं सरकार द्वारा आमजन को दी जाने वाली सुविघाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।

इसी कड़ी में समाज की प्रथम 'ई पत्रिका' की लांचिंग की जा रही है। जो कि प्रथम प्रयास है इसमें समाज के विभिन्न प्रदेशों में हो रहे आयोजनों की सुचनाऐं तथा समाचारों के साथ ही समाजसेवी, राजनीतिज्ञों, संतों, युवाऔं, मैरिज ब्युरों की जानकारी होगी तथा साथ ही समाज की अन्य पत्र पत्रिकाऔं के भी समाचार तथा समाजोपयोगी सामग्री का प्रकाशन इस 'ई पत्रिका' में किया जायेगा।

'माली सैनी संदेश' का उद्देश्य केवल समाचार पत्र का प्रकाशन करना ही नहीं वरन् समाज में एक नई सोच एवं जाग्रति प्रदान करना है जिससे माली सैनी समाज के लिए जिन महापुरुषों का नाम आज हमारे समाज के साथ अन्य समाज भी गर्व से लेते है उस समाज का मान सम्मान और बढे तथा भारत ही नहीं संपूर्ण विश्व में फैले हमारे समाज की प्रतिभाओं का आदर और सम्मान हो, तभी हम समझेंगे कि हम अपने प्रयास में सफल हुए है। आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हमारी यह 'ई पत्रिका' आपकी कसौटी पर खरी उतरेगी तथा समाज के सभी वर्गॉ के सहयोग से एक नई पहचान कयम करेगी।

Flippable Version

ई-पत्रिका